Thursday, January 14, 2021

current economy data

1.-Now petrol cess collections Rs 2.6 lakh crore a year. It was meant to end toll. NHAI spends mere Rs 6000 crore. शिवजी sarkar

इस ब्लॉग के बारे में

इसका ऑफिशियल नाम kashmirilalsjm. blogspot. Com है। 
2.  इसमें मुख्यता जो अपने 10 बिंदु है उन पर सामग्री रहेगी और यह सबसे अंतिम ब्लॉग है। क्रमांक 3 इस इसमें 10 बिंदु इस प्रकार से हैं
1. एक आप विकास 
2. दो अपना गट,
3.  आगामी कार्यक्रम व पिछली समीक्षा
 4 माइक्रो फाइनेंस में मेला 
5 अपने कार्यालय सटा से
 6. 50 के लगभग जो प्रान्त केंद्र, व विदेशी इकाइयां है।  है 
7. सातवां अपने 100 तक पूर्णकालिक व कार्यकर्ता 
8. आठवां रिसर्च 
9. नोवा युवा 
10. अपना क्षेत्र का विकास।

रिसर्च Research

रिसर्च
मुख्य बिंदु :
1. देशभर में चलने वाले रिसर्च सेंटर्स को देखना
2. ऐसे व्यक्तियों को  ढूंढना  जो रिसर्च कर रहे हैं  चाहे वह कहीं भी रहते हैं  उनको दायित्व देना  और उनके साथ  यहां से किसी को रिसर्च कर के नाते लगाना है ।  तीसरा जगह जगह  प्रकोष्ठ होला  खोलना  और  उनके समय-समय पर प्रस्तुति करवाना  चौथा  मास में एक बार हर प्रकोष्ठ की ऑनलाइन  गोष्टी करवाना है । 
1. 13.1.21 को श्री भगवती जी को मिले और उन्होंने आईसीएसआर का एक प्राइवेट रिसर्च सेंटर जयपुर में एक आईएएस ऑफीसर चलाते हैं वह देखने को कहा प्रोग्राम। और साथ ही मेहरोत्रा जी से बात करके अन्य दिल्ली स्थित रिसर्च सेंटर के देखने के लिए भी कहा। इसी प्रकार विभिन्न विश्वविद्यालय से एमओयू साइन करना और धीरे-धीरे उनके यहां क्या रिसर्च हो रही है उस को प्रभावित करना और उसके लिए अपने यहां भी एक व्यक्ति को बिठाना जो इन विषयों को सुमित आ जाए देखता जाए। क्रमांक 2 आज एक राज्यसभा सांसद श्री अश्विनी वैष्णव को मिलना हुआ जो राजस्थान से सांसद चुने गए हैं नहीं उड़ीसा से चुने गए हैं पुराने आईएएस ऑफीसर है एंट्री प्लस हैं देश विदेश से पढ़े हैं और कानपुर के आईआईटीएम है। पिछले 800 सालों में उन्होंने अपनी अर्थशास्त्र पर अच्छी पकड़ बनाई है और अर्थव्यवस्था कैसे आगे बढ़े रोजगार कैसे मिले इस पर फोर्स अध्ययन किया है। उनका सुंदरम जी के माध्यम से मिलना हुआ। क्रमांक 3 आज ही चौपाल कार्यालय पर बैठना हुआ विजय गोयल जी व प्रदीप चौहान जी के साथ और साप्ताहिक उनका अपना प्रेजेंटेशन चलें मार्च में किसी एक प्रमुख व्यक्ति का प्रेजेंटेशन हो तथा जो भी बात उसने प्रकट करने हो पहले लिख कर के भेजे हैं। बाद में सुशील पंचाल के घर गए मनोज जी से बात हुई वाह स्वाति रविंद्र सोलंकी गए थे उनसे भी इस विषय पर बातचीत हुई। जल्दी ही यानी 7 फरवरी को या उसके आसपास मुरली जी के साथ मिलकर एक चौपाल की बैठक बुला ली जाए और आगे की दशा दिशा तय की जाए।2 जो जो काम हमने रिसर्च के सोचे हैं उनमें से एक बार एक काम मेरे को लगता है यह जहां जहां भी मैं बोलता हूं या लिखता हूं उस पर गहरी रिसर्च हो रही है। ऐसा अच्छे भाषण करता हूं उसे या मोटिवेशनल स्पीकर से मैंने सुना है कि उनके पीछे एक सपोर्ट ऑफिस होता है जो उनकी स्पीच इसका विश्लेषण करता है नए उदाहरण देता है समय कहां व्यर्थ हुआ ऐसा बताता है। एक काम कीजिए हो ही सकता है। दूसरा काम सर्वे का हो सकता है कि हम अपने डाटा में से अपने लोगों से 1000, 2000, 5000 जो भी हैं उनका डाटा बैंक हमारे पास है उससे कोई सर्वे कराना उनकी राय जानना है उनके सुझाव देना और उनके क्षेत्र में क्या हो रहा है उधर ही रहो। तीसरा जो जो भी आंदोलन या तात्कालिक विषय आते हैं उस पर जानकारी एकत्र करना यथा अभी ऑनलाइन का चल रहा है इस पर नीचे का फीडबैक देना कौन-कौन जन नेता इस काम में लगे हैं आदि पता करना है इस गांव के अंदर हर प्रांत के विचार विभाग प्रमुख प्रचार प्रमुख आदि को लगाया जा सकता है। इसी प्रकार से जो अपने 1520 टॉपिक हमने कट्ठे किए हैं उनके बारे में भी नवीनीकरण करते रहना यथा हमारे स्वदेशी विकास की अवधारणा जिस पर कोई यूट्यूब निकालना है इस पर कोई अच्छा सा प्रेजेंटेशन तैयार करना है और इसको किस प्रकार कालों में बांटा जा सकता है इस पर विचार करना। फिर इस पर सर्वे करना कि हमारे देश के लोग क्या सोचते हैं संघ के लोग किसको सोचते हैं किसान संघ के बिछड़े हुए 50 कार्यकर्ताओं से बातचीत हो सकती है क्षेत्रों से बात हो सकती है और समाज भी कुछ जानता है या नहीं इसका भी विश्लेषण हो सकता है। कभी-कभी ऐसा लगता है यह काम तीसरी की सूची का नहीं है और हो सकता है उन्होंने किसी और दृष्टि से उसको देखा मैंने और दृष्टि से देखा इसलिए और चर्चा करके इस को आगे बढ़ाया जा सकता है। परंतु एक दूसरा विषय भी है के हो सकते हैं उनको लगता है कि वर्तमान टीम उनके पास है वह मात्र इतना ही कर सकती है इससे ज्यादा नहीं कर सकती है क्योंकि उसके बारे में वह अच्छी तरह जानते हैं तो क्या करना प्रश्नवाचक चिन्ह। ऐसे में कुछ नए लोग खड़े करना और इस काम के अंदर सुरेंद्र जी भी सहायक हो सकते हैं अजय उपाध्याय जी भी सहायक हो सकते हैं मनोहर शरण जी दुबे जी जैसे कितने ही लोग हैं जो इस विषय पर सहायक हो सकते हैं उन सब का भी सहयोग लेना। हर दृष्टि से पहला काम स्वयं ही करना होगा और अपने आसपास इस किस्म का ग्रुप खड़ा करना होगा। अभी इस 17 तारीख को डॉक्टर सुरेंद्र जी ने कुछ लोगों को इकट्ठा किया है। उनका कितना योगदान हो सकता है इस विषय पर इसका आचरण करना। अभी तक के इस दृष्टि से सोचेंगे बिंदु क्रमांक 1 एक कॉपी में मैंने जो जो विषय स्वदेशी के हो सकते हैं और परमानेंट हैं वह लिखे हुए क्रमांक 2 वीके कॉल जी ने इस विषय पर कुछ बिंदु तैयार किए थे शायद 22 बिंदु हैं उन पर संकलन करना। एक पुस्तिका जो पहले से अभ्युदय नाम से छपी है उसका अध्ययन करना और उस को आगे बढ़ाने का काम करना है। जो जो साहित्य पहले छपा है उसका नवीनीकरण करने का काम कर रहा है यथा भगवती जी का साहित्य और अभी जो लेटेस्ट पुस्तक छपी है उसमें काफी सारी अशुद्धियां हैं विशेष रूप से आंकड़ों की उसका अध्ययन करना और यह काम श्री चंद्र प्रकाश जी अच्छी तरह कर सकते हैं।

अप्रैल 21

माननीय भगवती जी के घर गए थे और उनका विचार था कि हमको 30 40 विशेष सिलेक्ट करके और उनके बारे में तीन चार व्यक्तियों की टीम बनाकर अभी से  काम कर देना शुरू चाहिए। इससे पहले विजय कौल जी ने लगभग 25 विषयों की सूची बनाई थी और यह सूची मैंने भगवती जी को भी दिखाई थी और मेरे पास अभी भी वह भी के लिखे हुए हैं बस उन पर टीम बनाना अति आवश्यक है। आज दिनांक 3 को अप्रैल को प्रवासी भवन में सीए से मिला और उन्होंने संकेत किया कीजिए सब काम मुझे ही करना चाहिए और महीने में 20 दिन यहां रह कर के कोडी डेट करना चाहिए फुल नाम तभी कुछ रिसर्च वर्क का लाभ होगा। श्री आंखें बारे में कहां की हो अच्छे ढंग से सरकारी लोगों से नहीं मिलते तो उन्होंने कहा कि आपको स्वयं मिलना चाहिए संबंध स्थापित करने चाहिए और नई-नई जानकारियां इकट्ठी करके फिर जिसको जहां भेजना है यह काम वैसा करना चाहिए। अपने साथी को महीने में 25 दिन प्रवास के लिए भेजो और आप आठ 10 दिन प्रवास बाकी समय यहां लगा कर के इन कामों पर कोऑर्डिनेटर करिए। आपका एक्सपोर्टर हो चुका है उनका करवाना चाहिए। मैंने जो कल्पना रखी उसमें यह था की अलग-अलग जगह पर जब प्रवास करते हैं तो वहां के लोगों की समस्याएं सुनते हैं वह कुछ साहित्य भी देते हैं परंतु उस पर कोई काम करने वाली टीम यहां नहीं होती है इसलिए कोई अनुवर्तन नहीं हो पाता। श्री आ का कहना है की मैं बहुत पहले से ही कहता आया हूं की रिसर्च की बहुत आवश्यक है और प्राइमरी डाटा हर चीज का अपने पास अपने माध्यम से आना चाहिए तभी कुछ बातचीत करने का लाभ दूसरे पक्षों से होता है।।