पृथ्वी के ऊपर क्या है, यह जानने के लिये तो हम चन्द्रयान और मंगलयान के "मिशनो" पर काम कर चुकें हैं, पर समुंद्र के अंदर क्या है, यह जानना अभी बाकी है।
इसी कडी मे बता दें की भारत का पहला समुंद्रयान जो कि इसी 29 अक्टूबर को लांच किया गया है। जो 75000 वर्ग किमी के क्षेत्र में पाॅलीमैटेलिक मैंगनीज नोड्यूल, कोबाल्ट कस्ट्र, हाइड्रो थर्मल सल्फाइड, गैस हाइड्रेट्स जैसे कीमती चीजों की खोज करेगी।
लगभग 350 करोड की लागत वाला यह समुंद्रयान, डीप ओशन मिशन का एक हिस्सा है, आपको बता दें की इस डीप ओशन मिशन के लिये मोदी जी ने छह हजार करोड रुपये का बजट पास किया है। इसी मिशन मे बहुत जल्द ही लांच होने वाला "गगनयान" भी है।
चैन्नई के महासागर मे लांच होने वाले इस समुंद्रयान का नाम "मत्स्य-6000" है और यह समुंद्र के 6 किलोमीटर अंदर तक लगातार 72 घंटे तक काम कर सकता है। यह अपने साथ 3 एक्वानाट्स (समुंद्र के अंदर की जानकारी रखने वाले वैज्ञानिक) को लेकर जायेगा। आपातकाल की स्थिति मे यह यान पानी के अंदर 96 घंटे तक भी काम कर सकता है।
इसे DRDO ने IITM और इसरो की मदद से 'स्वदेशी" रुप मे तैयार किया है, इस यान को बनाने मे टाइटेनिक के धातु का इस्तेमाल किया गया है। इसका टोटल व्यास 3.2 मीटर का है। और इसे "कंट्रोल" करने के लिये पानी के ऊपर एक बडी जहाज भी लगी रहेगी।