Tuesday, June 2, 2015

2. Our share in the world GDP and present status

2. Our share in the world GDP and present status: एंगस मेडिसन एक ब्रिटिश इकोनाॅमिक हिस्टोरियन हुये हंै, उनकी पिछले साल मृत्यु हो गई, उनको ओ.ई.सी.डी. देशों के समूह जिसमें सारे औद्योगिक देश आते है, अर्थात अमेरिका, यूरोप जापान कोरिया आदि देशों के इस संगठन ‘आर्गेनाइजेशन फार इकोनाॅमिक कोआॅपरेशन एण्ड डेवलपमेंट कंट्रीज’ ने कहा कि वे दुनिया का 2000 साल का आर्थिक इतिहास लिखंे। इस पर उन्होंने वल्र्ड इकोनाॅमिक हिस्ट्री: ए मैलेनियम पर्सपेक्टिव लिखा और वह जो मैलेनियम पर्सपेक्टिव उन्होंने लिखा उसमें उन्होंने कहा कि सन् शून्य ए.डी. से लेकर 1700 एडी तक अर्थात ईसा के जन्म से सन् 1700 ईस्वी तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। उनके अनुसार इस्वी सन् एक से 1000 ईस्वी तक भारत का दुनिया के जी.डी.पी. में 34 प्रतिशत हिस्सा या कन्ट्रीब्यूशन था। अमेरिका, यूरोप चीन सब पीछे थे। 1000 ईस्वी से 1500 ईस्वी के बीच विश्व के कुल उत्पादन में भारत का अंश 32 प्रतिशत था 1700 एडी में भी यह 24 प्रतिशत था। आज यदि हम देखें तो जब हम स्वाधीन हुए उस समय हमारा एक्सचेंज रेट के आधार पर विश्व के नामिनल जी.डी.पी. में योगदान 3.8 प्रतिशत था। मनमोहन सिंह जी ने जब आर्थिक सुधार लागू किये उस समय 3.2 प्रतिशत था और आज वो मात्र 2.5 प्रतिशत है। वल्र्ड जी.डी.पी. में हमारा अंश क्रय क्षमता साम्य (Purchasing power Parity) के आधार पर चाले 5 प्रतिशत अंष है, पर वह एक अलग अवधारणा है। ये केवल एक व्यक्ति ने कह दिया ऐसा नहीं. औरो ने भी लगभग ऐसा ही कहा है. पॉल बैरोच ने भी गीत की समीक्षा करते हुए कुच्छ ऐसा ही कहा.उन्दोने 1700-1980 तक की समीक्षा की. पाया ki 1700-1800 ईसवी तकभारत का हिस्सा 24.5% यानी पुअर दुनिया का एक चौथाई भारत का. और इस बीच पूरे यूरोप जिनके साम्राज्य में सूरज नहीं छिपता था उसका हिस्सा सिर्फ 23.2% था.
दीपक नय्यर ने भी काफी शोध किया और बताया की हज़ार साल पहले एशिया अफ्रीका एंड लैटिन अमेरिका की आबादी और इनकम 80% थी, और भारत और चीन दुनिया की आबादी और इनकम दोनों हिसाब से 50% से जिहड़ा थे. आगे 500 सालों तक और इंडस्ट्रियल क्रांति के पहले फेज तक, और 1820 तक घी भारत और चीन का हिस्सा 50% तक रहा.
बस सिर्फ 130 साल यानी 1820-1950 तक औद्योगिक उत्पादन दो तिहाई 65% से घट कर 10% आ गया. प्रति व्यक्ति आय भी 1820 में जो यूरोप से आधी थी वो मात्र 10% रह गयी. इस लिए सिर्फ 2000 साल के लिखित ईसाई कालगणना मैं सिर्फ 200 वर्ष मैं से भी सिर्फ एक चौथाई समय मैं ही भारत का स्तर नीचे आया वर्ना 75 पर सेण्ट टाइम हम यूरोप अमेरिका से ऊपर ही रहे, काफी उप्पर ही रहे, ये असली हिन्दू ग्रोथ रेट था

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